महाराष्ट्र में महिलाओं को आर्थिक मजबूती प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू की गई मुख्यमंत्री लाडकी बहिन योजना एक बार फिर सुर्खियों में है। इस योजना का मुख्य लक्ष्य राज्य की आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को हर महीने वित्तीय सहायता देना है, ताकि वे अपने जीवन यापन के खर्चों को आसानी से पूरा कर सकें। हालांकि, हाल ही में राज्य सरकार द्वारा बजट में इस योजना के लिए निर्धारित राशि में बड़ी कटौती किए जाने से लाभार्थियों और सामाजिक संगठनों के बीच चिंता का माहौल पैदा हो गया है।
योजना का उद्देश्य और शुरुआत
मुख्यमंत्री लाडकी बहिन योजना का शुभारंभ महाराष्ट्र सरकार ने जुलाई 2024 में किया था। इस योजना का प्राथमिक उद्देश्य उन महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान करना था, जिनकी पारिवारिक आय सीमित है और जो जीवन यापन में कठिनाइयों का सामना कर रही हैं। इसके तहत पात्र महिलाओं को हर महीने एक निश्चित राशि उनके बैंक खाते में सीधे भेजी जाती है, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें और घर के छोटे-मोटे खर्च पूरे कर सकें। सरकार का मानना था कि इस प्रकार की नियमित आर्थिक सहायता से महिलाओं की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और उनका जीवन स्तर ऊंचा उठेगा।
बजट कटौती और उसका प्रभाव
हाल ही में मार्च 22, 2026 को घोषित किए गए राज्य के बजट में इस योजना के लिए आवंटित राशि को कम कर दिया गया है। पहले जहां इस योजना के लिए लगभग 36,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था, अब इसे घटाकर 26,500 करोड़ रुपये कर दिया गया है। बजट में इस कमी के चलते चर्चा है कि आने वाले समय में योजना की पहुंच और लाभार्थियों की संख्या सीमित हो सकती है। कुछ लोगों का मानना है कि कम बजट के कारण योजना के वितरण ढांचे में भी बदलाव किया जा सकता है, जिससे कई महिलाओं तक यह सहायता पहुँचने में बाधा उत्पन्न हो सकती है।
सत्यापन प्रक्रिया और लाभार्थियों की संख्या
योजना के तहत लगभग 1.53 करोड़ महिलाओं को लाभ मिलने का अनुमान लगाया गया है, जो पहले की तुलना में कुछ कम बताई जा रही है। इसका एक प्रमुख कारण हाल ही में राज्य सरकार द्वारा चलाया गया सत्यापन अभियान रहा। इस अभियान के दौरान लाभार्थियों के दस्तावेजों और पात्रता की जांच की गई थी, जिसके परिणामस्वरूप कुछ नाम सूची से हटाए गए जिन्हें पात्र नहीं माना गया। सरकार का कहना है कि यह प्रक्रिया यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक थी कि केवल वास्तविक जरूरतमंद महिलाएं ही इस योजना का लाभ उठा सकें।
मौजूदा वित्तीय सहायता और संभावित बदलाव
वर्तमान व्यवस्था के अनुसार, इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने लगभग 1,500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। पहले यह उम्मीद जताई जा रही थी कि इस राशि को बढ़ाकर 2,100 रुपये प्रति माह किया जा सकता है, लेकिन अभी तक इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। यदि प्रति महिला 1,500 रुपये मासिक सहायता दी जाती रहती है तो भी पूरे वर्ष के लिए बड़ी राशि की आवश्यकता होगी। अनुमानित रूप से इस योजना को सुचारू रूप से चलाने के लिए लगभग 27,000 करोड़ रुपये से अधिक धनराशि चाहिए होगी, जो वर्तमान बजट आवंटन से अधिक है।
राज्य सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि भले ही बजट में कटौती हुई हो, लेकिन पात्र महिलाओं तक सहायता पहुंचती रहेगी। हालांकि इन परिवर्तनों ने योजना की स्थिरता और भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसका मुख्य उद्देश्य अब भी महिलाओं को सशक्त बनाने और उनकी आर्थिक स्थिति सुधारने का बना रहेगा।
Disclaimer: प्रस्तुत लेख मार्च 22, 2026 तक उपलब्ध सूचनाओं पर आधारित है और इसका उद्देश्य सरकारी योजनाओं की जानकारी देना मात्र है। नीति या कार्यक्रमों संबंधी किसी भी नए अद्यतन या व्यक्तिगत निर्णय लेने से पूर्व सरकारी अधिसूचना या विशेषज्ञ सलाह लेना जरूरी होगा।








